Sunday, September 7, 2008

अब औरत होने का सबूत पेश करना होगा?

रमजान का महीना शुरू हुए हफ्ता हो चुका है. इन दिनों कुछ रोजों की मसरूफियत और कुछ नेट की प्रोब्लम्स की वजह से ब्लॉग की दुनिया से नाता तकरीबन टूट सा गया था. 
अपने पसंदीदा अदीबों और शायरों की याद तो आती रही और उनकी लिखी पोस्ट पढने को दिल भी मचलता रहा लेकिन सच कहूँ तो ये याद पिछली गैर हाजिरी की तरह फर्स्टऐट नहीं करती थी. ये रमजान और रोजों का नशा था जनाब जो सारी दुनिया को भुला देता है यहाँ तक कि खुद को भी. 
इसलिए इस बार इतनी जल्दी भी नहीं थी. लेकिन कुछ दिन पहले अनुराग जी के मेल ने एक अजीब खबर दी कि किसी सज्जन ने अपने ब्लॉग पर लिखा है कि मैं एक परुष हूँ जो रख्शंदा यानी महिला के नाम से लिखता है. 

मेरी बहुत साडी खामियों में से एक खामी ये भी है कि मैं किसी मामले को शुरू में इतनी संजीदगी से नहीं लेती. इस बार भी ऐसा ही हुआ. हाँ, अनुराग जी से मैंने उन साहब का नाम ज़रूर जानने की ख्वाहिश की. 
सच कहूँ तो उस लम्हे मुझे बस यही लगा कि किसी ने यूंही मजाक में ऐसा लिखा होगा लेकिन जब उन्होंने उन साहब का नाम लिखा तो मुझे उस पोस्ट को पढने की बड़ी ख्वाहिश हुयी क्योंकि घोस्ट बस्टर को मैंने काफी कम पढ़ा है लेकिन बावजूद इसके मैं उन्हें एक काबिल और संजीदा किस्म का ब्लोगर समझ कर उनका एहतराम भी करती थी. 
इत्तेफाक से सर्च करते हुए मुझे ब्लोग्वानी में वो पोस्ट मिल गयी जो इन दिनों में सब से ज्यादा चर्चित पोस्ट रही थी. जब मैंने उसे पढना शुरू किया तो इसके चर्चित होने की वजह बड़ी आसानी से समझ में आगई. 
अरे भाई, जब आप सड़क पर खड़े हो कर किसी को गाली देने लग जाएँ, यहाँ तक कि गांधी जी को, तो थोडी देर के लिए लोग आपकी तरफ मत्वज्जा तो हो ही जायेंगे और आप थोड़े दिनों के लिए ही सही, चर्चा का विषय बन ही जायेंगे. 
एक मजेदार घटना याद आरही है. विवेक ओबराय ने एक बार मीडिया में खुद को चर्चित करने के लिए एक बड़ा आसान तरीका अपनाया था . उन्होंने प्रेस को बताया कि एक रात सलमान खान ने सारी रात उनको कॉल किया और ४१ बार जान से मारने की धमकी दी…बड़ी हंसी आई थी उस समय, दिल चाह पूछूँ कि विवेक जी, आपके मोबाइल में सिविच ऑफ करने का आप्शन नहीं था जो सारी रात सलमान की धमकी सुनते रहे? 
आज सलमान कहाँ हैं और विवेक कहाँ, ये सारी दुनिया जानती है लेकिन उन दिनों चर्चा का विषय तो खैर विवेक जी बन ही गए थे. 

अब घोस्ट की पोस्ट पर…..उस पोस्ट में एक बेहद काबिल और काबिल-ऐ-एहतराम लेखक को बुरा भला कहा गया था तथा उनकी बेहद शानदार और बेहद सच्चाई पर आधारित पोस्ट को घटिया कह कर उनका मजाक बनाया गया था. 
उसके बाद उन्होंने मुझ पर निशाना साधा था और बाकायदा हाईलाईट करते हुए मेरी एक पोस्ट के खिलाफ ज़हर उगला था. 
खैर जिस इंसान ने अभय जी जैसे ब्लॉगर को नहीं बख्शा उसने अगर मुझे गलत ठहराया तो इतनी हैरानी की बात नहीं थी लेकिन बात अगर विचारों की असहमति तक सीमित होती तो मुझे बुरा नहीं लगता लेकिन यहाँ बात विचारों तक सीमित नहीं थी. यहाँ बड़ी बेशर्मी के साथ मुझे व्यक्तिगत तौर से निशाना बनाया गया था. 
मैं उन साहब की हिम्मत पर हैरान हूँ कि बगैर किसी को जाने हम किसी के बारे में मामूली बात भी लिखते हुए दस बार सोचते हैं, यहाँ तो बिना किसी सबूत के मुझे महिला से पुरुष बना दिया गया.
 
ब्लोगिंग हो या कोई और मंच , हर जगह के कुछ उसूल होते हैं जिन्हें सख्ती से निभाने की ज़रुरत होती है. किसी को व्यक्तिगत तौर से हम निशाना नहीं बना सकते, लेकिन यहाँ तो जैसे कोई उसूल ही नहीं रह गया . 
कल को अगर मैं अपने ब्लॉग पे लिखती हूँ कि घोस्ट बस्टर जी असल में एक महिला ( महिलाओं की बेईज्ज़ती के लिए माफ़ी चाहूंगी) हैं या पुरुष और महिला का मिला जुला रूप हैं या फिर कोई जानवर हैं जो इंसान या शैतान के नाम से ब्लॉग लिखता है तो यकीनन आप सब को बुरा लगेगा क्योंकि मेरे पास इस बात का कोई सबूत जो नहीं है तो मैं अपने बेहद काबिल-ऐ-एहतराम ब्लोगरों से पूछती हूँ कि जब उस इंसान ने मुझ पर कीचड़ उछाला तो आप में से कितनों ने उस से जवाब माँगा? कितनों ने उस से सबूत माँगा? 
उल्टा एक साहब ने बड़ी हैरानी जताते हुए लिखा कि अच्छा रख्शंदा एक पुरुष है? ये तो मुझे पता ही नहीं था…मतलब ये कि अच्छा हुआ आपने ये सनसनीखेज़ खुलासा कर दिया. 
ज़ाहिर सी बात है ऐसी सनसनीखेज़ बातें हमारी कमजोरी जो ठहरीं. 
उस पोस्ट को पढ़ कर ही मुझे अंदाजा हुआ कि ब्लोगिंग की दुनिया में कुछ ज़हरीले सांप भी मौजूद हैं जो अपने विनाशकारी ज़हर से इस खूबसूरत दुनिया को उसी तरह ज़हरीला कर देना चाहते हैं जिस तरह हमारे समाज में कुछ ज़हरीले लोग नफरतें बोने का काम करते हैं. 
ज्यादा दुःख मुझे उस इंसान के घटिया विचारों या उसके इल्जाम पर नहीं हुआ, ज्यादा अफ़सोस इस बात का हुआ कि किसी ने भी मेरी तरफ से उस इंसान से जवाब नहीं माँगा कि बिना किसी सबूत के उसे किसी लड़की पर ऊँगली उठाते हुए शर्म क्यों नहीं आई. 
सुजाता जी जो ब्लोगिंग की दुनिया में सच्चे मायनों में औरतों की रहबरी का काम करती हैं, उन्होंने भी इस बेशर्मी का विरोध नहीं किया…खैर हो सकता है कि उन्हें इस बात का पता ही न चला हो…लेकिन आज मैं इस   पोस्ट के ज़रिये आप से पूछती हूँ  कि क्या मुझे अपने महिला होने का कोई सबूत  पेश करना होगा? 
मुझे इस  बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कुछ लोग मुझे क्या समझते हैं लेकिन व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाना की ये  घटिया मानसिकता बंद होनी चाहिए .आप अपने सशक्त और सुंदर विचारों से चर्चित हो सकते हैं, समाज की समस्याओं को समाज के सामने पेश कर सकते हैं, जिस तरह से बहुत से काबिल ब्लोगर्स कर रहे हैं, समीर जी, अनुराग जी, दनिश जी, रंजू जी सुजाता जी, ऐसे कितने नाम हैं जो बहुत मशहूर हैं और लोग उनकी पोस्ट पढ़े बिना नही रहते, मैं तो बस मिसाल के तौर पर ही कुछ नाम ले रही हूँ वर्ना ऐसे बहुत नाम हैं जो लिखे जा सकते हैं.दूसरों के बारे में उलटी सीधी बातें लिख कर आप कब तक अपना उल्लू सीधा कर सकते हैं? 

और इसके लिए मैं  यकीनन आप सब का साथ चाहूंगी.
मुझे यकीन है  कि मुझे निराश नहीं होना पड़ेगा.

52 comments:

अफ़लातून said...

रख्शन्दाजी आप घोस्ट की पोस्ट से बिलकुल मायूस न होंगी । हिन्दुस्तान में एक जमात ऐसी है जो हिट्लर की भी कायल है और ज़ियोनिज्म की भी । इनका विचार - राष्ट्रतोड़क राष्ट्रवाद है । काठ की हाँड़ी बार बार चूल्हे पर नहीं चढ़ाई जा सकती ।इसलिए ये विफल होंगे।

कामोद Kaamod said...

"अब औरत होने का सबूत पेश करना होगा?"

बहुत गम्भीर बात है ये..
ऐसे साँप हर क्षेत्र में होते हैं. घबराने की जरूरत नहीं है.
लिखिये, खूब लिखिये और मुस्कुराते रहिये. :)

Shastri said...

लिखती रहें! इससे बडा और कोई प्रमाण नहीं चाहिये!!



-- शास्त्री जे सी फिलिप

-- हिन्दी चिट्ठाकारी अपने शैशवावस्था में है. आईये इसे आगे बढाने के लिये कुछ करें. आज कम से कम दस चिट्ठों पर टिप्पणी देकर उनको प्रोत्साहित करें!!

शायदा said...

रख्‍़शंदा मैंने वो पोस्‍ट पढ़ी थी और यह भी कि वहां प्रिटी वुमन नाम की ब्‍लॉगर पर मर्द होने का शक किया गया था। मुझे भी इसे पढ़कर दुख हुआ था। डॉ अनुराग ने भी किसी दूसरी पोस्‍ट पर अपने कमेंट में इस बात पर दुख ज़ाहिर किया था। मुझे यक़ीन है कि मेरे जैसे और कई ब्‍लॉगर होंगे जो किसी न किसी वजह से इस मामले में अगर पहल न भी कर पाए तो कम से कम उन सा‍हिब की हरकत पर दुखी ज़रूर होंगे।
रही बात सबूत पेश करने की तो भई, यहां कई ऐसे लोग मिलेंगे जो की आपसे कई और चीज़ों का सबूत मांग बैठेंगे या पूछेंगे कि फलां सर्टिफिकेट लिया या नहीं,आदि आदि। तो इन सब पर ध्‍यान न देकर खु़श रहें और लिखती रहें।

रंजना [रंजू भाटिया] said...

""और फैलुंगी जो लौटाओगे आवाज़ मेरी ,इतना गूंजुंगी की सदियों को सुनाई दूंगी."'

.यह बात लिखने वाली शख्सियत किसी पहचान की मोहताज नही .आप अपना लिखो और खूब लिखो रक्षंदा ...

Lovely kumari said...
This comment has been removed by the author.
रचना said...

just keep writing and at least you have a name , and why give so much importance to whether a blogger is a man or woman , a blogger is a blogger its only in this hindi bloging they have made mahila and purush blogger . all my comments in english they would point out SHE WRITES IN ENGLISH or that she is a woman and still she speaks in louder tomes on gender bais. I really was so bugged with their attitude that I MADE A SEPARATE BLOG WHERE ONLY WOMAN BLOGGERS CAN CONTIRBUTE . its in hindi blogign they give prizes to woman blogger because she is a woman .
DONT BOTHER AND DONT CARE let them call you man because man is someone who has strength to write and face truth . Paurush kae liyae purush hona jarurii nahin haen . BE happy that your writing are so powerful that they feel you are one of them , i wish they had said the same about all woman who blog
now smile and cheer up

Anonymous said...

हमने तो सोचा था कि भूतनाशक को एकाध डांट पिला आयें, लेकिन हम तो ठहरे भूत, और वो नाशक इसलिये डर गये

वैसे अभय जी के बारे में भूतिये ने जो कुछ भी कहा इसके पीछे कुछ ज्ञानी पंडितों का हाथ था जो कि स्वभावत: स्त्री विरोधी हैं और इसी के चलते अभय जी से डांट खा चुके हैं, इसी बात बद्ला भूतू भाई ने लिया है, और पीछे ज्ञानी लोग फुर्सत से ताली बजा रहे हैं

बकिया आप को लपेट लिहिस क्योंकि आप साफ्ट टार्गेट लागी रहीं, लेकिन आप तो जो रहपट दिये हैं कि अब तो बोलते न बनी

अब हम क्या कहे, आपने तो वो कुछ कह डाला की भूतनाशक मिंया मुंह छिपाई भी लेने नाहीं आवेंगे

जय रकसंदा जि

-- प्रेत

ओमप्रकाश तिवारी said...

Aap ko निराश नहीं होना पड़ेगा. jin sahab ne Aap ke Khilaf aisi ghatiya mansikta dikhae unki bhi tammanna vivek ki tarah rahi hogi.

नीरज गोस्वामी said...

कीचड में पत्थर डालेंगे तो अपने ही कपड़े ख़राब होंगे...आप ऐसे लोगों की परवाह किए बिना लिखती रहिये...आप के लेखन के प्रशंककों की कमी नहीं है...
नीरज

mamta said...

रक्षंदा आज आपको बहुत दिनों बाद देख कर बहुत अच्छा लगा ।पर पोस्ट पढ़कर हम चौंक गए। इधर बीच मे हम भी ज्यादा ब्लॉगिंग नही कर रहे थे इसलिए हमें तो पता ही नही था बीच मे ऐसा भी कुछ हुआ है ।

आप ऐसी बातों पर ध्यान न दें और निश्चिंत होकर लिखें ।

बलबिन्दर said...

क्यों ध्यान देती हैं, ऐसी बातों पर!
आप तो बस लिखती रहिये।

अनुराग said...

मै मानता हूँ आप क्रोधित है ,हताश है ...घोस्ट बस्टर साहब एक स्पष्टवादी इंसान है ओर पूर्व में उनकी कई टिपण्णी में ईमानदारी दिखती है लेकिन स्पष्टवादिता जब तक अपेक्षित विनम्रता से संतुलित नही होती ,अपना असर खो देती है ..आपकी भाषा भी कही कही कठोर हो गयी है ,गुस्सा आपकी पोसिटिव एनर्जी खींच लेगा......जब कोई मुझ पर पोस्ट लिखता है ,मै मुस्करा कर आगे बढ़ जाता हूँ....
एक बात ओर द्रिवेदी जी स्पष्ट शब्दों में आपके बारे में घोस्ट बस्टर जी से कहा था की उन्होंने बिना किसी पूर्व जानकारी के ये क्यों लिखा ......ब्लॉग जगत में सब समझ दार लोग है सब जानते है.....कुछ कहते भले ही न हो.....आप बस अच्छा लिखिए....
ओर लिखती रहिये.....

प्रेमलता पांडे said...

जब हम कुछ बोलते या लिखते हैं,चाहे कितने भी संयत रहें, हमारा मन उजागर हो जाता है| आपको कोइ स्पष्टीकरण की आवश्यकता नहीं है|
आप तो बस लिखें| आपको पढ्ना अच्छा लगता है|

ई-गुरु राजीव said...

शायद दूसरी तीसरी बार आया हूँ इस ब्लॉग पर लेकिन हमेशा मैंने आप को फोटो वाली बाई ही समझा.
मुझे ताज्जुब होता है कि जब कोई ब्लॉगर के यूज़रनेम के पीछे के चेहरे को जानने को व्यग्र हो जाता है. अरे भाई ! क्या ज़रूरत है इसकी ! एक ब्लॉग र हमेशा एक ब्लॉग र ही होता है चाहे नर हो या नारी. दोनों समान हैं. हाँ कभी जिज्ञासा हो सकती है हम जिससे बात कर रहे हैं वह कौन है, पर इसके लिए किसी को भी यह हक़ नहीं है कि उसके पीछे ही पड़ जाए. मुझे इस विवाद की कोई जानकारी नहीं थी, पर अब जब जन है तो उन सज्जन पर गुस्सा आ रही है.
मैं भी लंबे समय तक अपनी फोटो नहीं लगा पाया था क्योंकि मेरे पास सुविधा नहीं थी. अब जब उपलब्ध हुई तो आप सब मुझे देख सकते हैं.
आप लिखती रहिये.
एक बार फ़िर कहूँगा कि एक विचार बस एक विचार होता है चाहे उसके पीछे दिमाग नर का हो या नारी का.
ऊपर प्रेमलता जी ने भी सही कहा है.

Manish Kumar said...

Aisi koyi post likhi gayi hai ye mujhe aaj hi pata chala. Aur aap nahin likhtin to shayad pata bhi nahin chalta.

Nischay hi ye dukhad hai par aise aakshepon par dhyan na de kar wo likhte rahna jis par aapko yakeen hai jyada sahi marg hai. Is terah ke articles pe react kar nahak inhein publicity ka mauqa na lene dein.

सचिन मिश्रा said...

Aap nirah na ho, bus likhti rahiye.

Lavanyam - Antarman said...

स्त्री या औरत,
२१ वीँ सदी की
आधुनिका भी हो गई !
अब उसके आगे
क्या देखती हैँ आप
स्त्री के लिये ?
ये आपके विचार भी
सामने रखियेगा -
तभी कोई नेतीजे पर पहुँचने का निस्चय सँभव है -
"कुछ तो लोग कहेँगेँ
लोगोँ का काम है कहना,
छोडो बेकार की बातोँ मेँ
कहीँ बीत ना जाये रैना "
ये गाना सुना ही होगा आपने ~~
और सबसे आगे,
रमजान के मौके पर
आपको,
सुकून मिले
यही दिली तमन्ना है
रक्षँदा जी !
स्नेह,
- लावण्या

डा. अमर कुमार said...

.

ऎ लड़की, काहे हलाकान होती है ?
पहले तो रमज़ान मुबारिक़, ख़ुदा तेरे रोज़े कुबूल करे, इसलिये चल थोड़ी देर को इनको जीजा मान ले.. और हँस के भूल जा ।
जिस हिम्मत से तू तफ़सरे लिख रही है, दुनिया में कईयों को हलाकान होना ही था । गौर कर कि तेरे ये जीजा... कितने दिनों के बाद तशरीफ़ लाये हैं... अगस्त माह के बीस दिन ढाई-सौ वेब पेज़ चाटने वाले की नज़रें थोड़ी धुँधली न हुई हों, तो उन्हें धुँधला करने को प्रिटी-वोमेन के तख़ल्लुस से बेहतर और क्या मिल सकता था ?

अब अपनी वापसी के ऎलान का बायस तुझको बनाया... कितने लोग.. बल्कि मैं भी तस्दीक करने दौड़ कर उल्टे पाँव तेरे ब्लाग पर गये । देख तेरा काउंटर क्या बता रहा है, ट्रैफ़िक बढ़ी कि नहीं, फिर ?
रमज़ान में मोहर्रम मनाने लग पड़ी ।
रंज़ न कर, इबादत के महीने का ये हफ़्ता तो रहमत का हुआ करता है, और तुझे बदले में एक अदद जीजा का तोहफ़ा मिला है, छेड़ छाड़ का क्या करना.. मस्त रह !

मैंने इनको थोड़ा लपेटने की कोशिश की थी, इस टिप्पणी से..
" ऎ भाई लोगों, तनि हमको भी इस बौद्धीक बैठक में बहसियाने का मौका दिजीए ..
अ मउका दीए हैं त तनि सूतवा अउर कपसवा देखा न दिजीए, हम भि लट्ठमलट्ठा करें ! "

अब इन ज़नाब ( ग़र सबूत दें कि ज़नाब ही हैं, तो ? ) के पास कोई सूत कपास हो तो दें भी,
अमेरीका में बैठे इस शख़्सियत को जोड़ तोड़ में कई नायाब इल्म हासिल है । क्या करेगी ज़्यादा जान कर.. बस ये समझ कि हाशिये पर बैठ, दूसरों पर कंकड़ियाँ फेंक फेंक यह अपने ख़ुदा होने के गुमाँ को पोस रहें हैं... यहाँ मुख़्तलिस तो यही है कि....
जितने भी ब्लागिये हैं दुनिया में उतने ही ख़ुदा मौज़ूद यहाँ
असली है यहाँ पर कौन खुदा इसको तो बताना मुश्किल है


ऎसी मुश्किलातें और भी बढ़ जाती हैं, जब तेरी जैसी लड़की " इतना गूंजुंगी की सदियों को सुनाई दूंगी " का नारा बुलंद करती छुट्टा घूम रही हो । और अक़्लियत के दुश्मन इन जीजा को किसी मज़बूरी में इस शैतानी नाम के बुर्के में बंद रहना पड़ रहा हो ! नमस्ते बोलना... अपने इन जीजा जी को..


हाँ, एक ऎतराज़ दर्ज़ कर ले.. शख़्सियत और दिमागदारी की लड़ाई में अपने दीन को न घसीटा कर ।
किसी का भी दीन, जिसमें मेरा भी शामिल है,, इन्हीं चीजों से नापाक हुआ करता है । दीन अपनी हिफ़ाज़त खुद कर सकता है, बशर्ते उसमें इंसान अपनी दख़लंदाज़ी बंद कर दे । ईमान की पाबंद रह, यह इबादत का पाक महीना है ।

दिनेशराय द्विवेदी said...

रक्षंदा जी, कल व्यस्त रहा आज इस आलेख को पढ़ा और घोस्ट बस्टर को भी। आप के लेखन में कभी किसी इंसान के प्रति दुर्भाव न दिखा। आज कुछ दिखाई भी दिया तो शायद इस लिए कि वह शायद इंसान कहलाने के लायक नहीं। मैं डॉ. अमर के वक्तव्य की ताईद करता हूँ। आप लिखती रहें, लगातार यही जवाब है। बिना इस पर ध्यान दिए कि कुछ लोग क्या कहते हैं। जब भी लोग इबादत करने बैठते हैं तो वहाँ कोई खलल पैदा करने वाला अवश्य होता है। सच्चा इबादती वही है जो उस खलल को दर किनार कर अपनी इबादत में जुटा रहे और उसे पूरा करे।

Beji said...

बात गलत है या बात गलतफहमी है?!!!

pallavi trivedi said...

रक्षंदा....मैंने वो पोस्ट तो नहीं पढ़ी है लेकिन समझ सकती हूँ की आप कितना परेशान हैं! लेकिन ऐसी बातें जीवन न जाने कितनी बार आएँगी...इसलिए विचलित न हों! आपको जानने वाले अच्छी तरह आपको जानते हैं!इसलिए खुश रहिये और लिखती रहिये....रमजान मुबारक.

Anonymous said...

rakshnanda जी
आजकल हिन्दी ब्लोग्स में " भाई _ बंधू " का खेल चल रहा है ,कुछ लोग बस तीन चार लोगो को महान बताते है तू मेरी खुजा मै तेरी खुजा वाला ,अब देखिये घोस्ट बस्तर जी इतना हंगामा उठा रहे है ,ख़ुद का नाम भी नही बत्ताते ,इनका इतिहास इतना कड़वा रहा है की पूछिए मत जहाँ देखो वही कड़वी टिपण्णी ,ख़ुद बुद्दिजीवी है बाकि सब घास छीलने वाले ,उनके एक दो समर्थक है जो हर चार पोस्टो के बाद "टंकी "पे चढ़ जाते है ,क्या करू ?कैसे लिखूं ? अब गाड़ी की डिक्की उठा दो ,ऐसे लोग है जो इनके साथ है तो ठीक वरना सारे मिलकर उसको घेरते है .बाकी जो सो कॉल्ड बड़े bloggars है ,साँस नही लेगे की पतली गली से निकल लो भईय्या किसी का बुरा नही बनना है ,टिप्पणी आनी बंद हो जायेगी ,सब सब के सब साले टिप्पणी को रोते है ओर कहते है हमें टिप्पणी का मोह नही ,अच्छा हुआ एक लड़की होकर आपने इत्ती हिम्मत दिखायी .

निरन्तर - महेंद्र मिश्रा said...

दुनिया में अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के व्यक्ति होते है . बुरे सांप लोगो से डरना ये बुरी बात है . निर्भीकता के साथ निरंतर ब्लॉग लेखन जारी रखे . राह पर चलते समय कंकड़ पत्थर तो मिलते रहते है पर इंसान क्या राह चलना छोड़ देता है .

कुश एक खूबसूरत ख्याल said...

जब आप मशहूर होते है तो कई लोगो को मशहूर होने का मौका देते है.. आप चिंतित थी की किसी ने वहा कुछ लिखा नही.. आपको खुशी होनी चाहिए की किसी ने वहा कुछ लिखा नही.. बाकी आप समझदार है..


ज़्यादा कहूँगा तो आप मेरी एंट्री बंद कर देगी अपनी ब्लॉग पर :) आजकल यही डर लगा रहता है.. :)

वैसे मुनीश बाबू की टिप्पणी नही आई इस बार??

अनुराग अन्वेषी said...

'फरवरी माह के अंत में मैंने हिन्दी ब्लॉग्स को डिस्कवर किया था. उस समय एक बड़ा विवाद अपने अंत की ओर अग्रसर था. मुझे पूरी तरह जानकारी नहीं है, मगर ऐसा लगता है कि भड़ास नामक ब्लॉग को लेकर "मोहल्ला" और "चोखेर बाली" का कोई झगड़ा था. जब समूचा ब्लॉग जगत भड़ास की भाषा को लेकर कराह रहा था और महिलाओं की तो छोडिये, अधिकांश भद्र पुरुषों तक ने अपनी नाक पर रूमाल रख कर उस ओर से मुंह फेर लिया था, तब कई फर्जी महिला आइडेंटिटी बनाई गयीं, जिन्हें हम सब जानते हैं. इन फर्जी महिला चरित्रों के अलावा ब्लॉग जगत से और कोई महिला वहां कभी नहीं दिखी. इस बात की असलियत पूरे ब्लॉग जगत को पता थी सिवाय उन भड़ासियों के जो इन्हें बना और चला रहे थे और इन महिलाओं के जो आपस में एक दूसरे को असली मानकर कमेन्ट देती थीं.

रख्शंदा एक ऐसा ही नाम है. इस नाम से वहां कई पोस्ट्स और ढेरों कमेन्ट लिखे गए जो अब भी मार्च अप्रैल की भड़ास की पोस्टों पर देखे जा सकते हैं. क्या शक नहीं होता कि यह श्रीमान भड़ास से जुड़े हुए कोई पत्रकार हैं?'

ऊपर की बातें भूतजी की झोली से उठाई गई हैं। भूतजी का एक इशारा यह भी है कि रख्शंदा एक फर्जी नाम है, जिसे मार्च-अप्रैल की टिप्पणियों के लिए गढ़ा गया था।
भूतजी की बातें भूत के अस्तीत्व की तरह ही आधारहीन तब लगने लगीं, जब रख्शंदाजी के प्रफाइल को मैं झांकने गया। वहां मेंशन कि यह ब्लॉग अक्टूबर 2007 में क्रिएट किया गया है। गौर करें कि क्रिएशन का यह समय है ब्लॉगर वहां फीड नहीं करता, बल्कि जब आप ब्लॉग क्रिएट करते हैं तो यह सूचना खुद-ब-खुद वहां आ जाती है। यह अलग बात है कि अक्टूबर में क्रिएट करने के बाद रख्शंदाजी की पहली पोस्ट 7 मार्च 2008 को आई। यह भी देखना रोचक होगा कि इनकी शुरुआती पोस्ट पर टिप्पणियां या तो नहीं है या उनकी संख्या बेहद कम हैं
ठीक इसके उलट, भूतजी का ब्लॉग '2008 में क्रिएट हुआ है। ध्यान रहे कि यह वही वक्त है जब मोहल्ला और भड़ास अपनी-अपनी पोल खोल रहे थे। यह अलग बात है कि भूतजी की पहली पोस्ट मजदूर दिवस के दिन आई। साथ ही 35 कमेंट भी मिले। यानी, एक स्ट्रैटजी के तहत यह जनाब दूसरों के ब्लॉग पर टिपियाते रहे और पहली पोस्ट में ही चर्चित भी हुए।
कहने का मतलब सिर्फ इतना कि रख्शंदाजी की ब्लॉगिंग में स्ट्रैटजी नहीं झलकती पर घोस्ट बस्टर जी में स्ट्रैटजी की बू आती है।

rakhshanda said...

आप सब ने मुझे जो हौसला दिया है, मैं उस के लिए आपका शुक्रिया अदा करूँ तो बहुत छोटी बात होगी...आप का साथ मेरी ताकत है..हिम्मत है, फिर भी इतना ज़रूर कहूँगी की इन बातों ने मुझे कितना दुःख पहुँचाया है इस का अंदाजा आप में से शायद ही कोई लगा सके...बहुत सारे लोगों में, बहुत बड़ी भीड़ में, जब सब की नज़रें ख़ुद पर मर्कूज़ हों और वो भी थोड़ा शक लिए हुए तो विश्वास ख़त्म होने लगता है...पहले और आज में काफी फर्क आगया है. जिस बात को मैंने हँसते हुए यूंही मजाक में लिया था, आज वही बात मुझे किस हाल में ले जारही है, मैं लिख नही सकती....देखिये,,मैं यहाँ बहुत मशहूर होने या बहुत नाम करने के मकसद से नही आई...सच पूछिए तो कभी सोचा ही नही था की ब्लॉग लिखूंगी..मैं हमेशा कहानी लिखती रही हूँ, मेरी कहानियाँ आज से नही, जब मैं दसवीं में थी तब से छाप रही हैं लेकिन संजीदगी से मैंने इसे भी कभी नही लिया.
.एक बार अख़बार में...हाँ, वो अमर उजाला का रविवार का पन्ना था जिस में मैंने ब्लॉग के बारे में पढ़ा, बस एक ब्लॉग देखा नाम था भड़ास...मैंने देखा इसके बहुत सारे सदस्य हैं,,,मेरी बहन ने कहा क्यों न तुम भी इसकी मेंबर बनकर ब्लोगेर बन जाओ, बस मजाक मजाक में उस ब्लॉग के यशवंत जी को मेल किया और दूसरे दिन ही मेंबर बन गई, अपना ब्लॉग तो बस यूंही बना लिया, जो बहन ने नाम सजेस्ट किया, रख दिया...कभी सोचा ही नही था की इन बातों का मुझे जवाब देना पड़ेगा...अपनी कहानी सुनानी पड़ेगी....भड़ास में लिखते हुए मैं ने कभी भड़ास की दूसरी पोस्ट पर ध्यान नही दिया, बस मेरा मकसद लिखना था और चूंकि भड़ास को ज़्यादा लोग पढ़ते थे इसलिए वही पर लिखती रही, लेकिन धीरे धीरे वहां की भाषा और गाली गलौज मुझे हर्ट करने लगी, मुझे लगने लगा की मैं ग़लत जगह पे लिख रही हूँ लेकिन डा.रूपेश जी जो मुझे छोटी बहन कहते थे, और जिन्होंने मुझे लिखने का काफी हौसला भी दिया, उनके कारन मैं वहां से हट नही सकी, सच कहूँ तो ब्लॉगवाणी के बारे में मुझे उन्ही से पता चला...भड़ास पर लिखना मुझे घुटन देने लगा था तभी मोहल्ला और भड़ास में जो बातें हुयीं उस से मुझे लगा की मुझे हर तकल्लुफ भूलकर अपना नाम वापस ले लेना चाहिए और मैंने यशवंत जी को लिख दिया, उन्होंने तुंरत मेरा नाम महिला मोर्चा से तो हटा दिया लेकिन सदस्य के रूप में नही हटाया, मुझे इस बात से कोई समस्या नही थी इसलिए मैंने जिद नही की...बाद में आप सब की इतनी हौसला अफजाई मिली की ब्लोगिंग मेरी जिंदगी बन गया....मैंने हमेशा वही लिखा जो मुझे सही लगा, लेकिन आज बहुत अजीब सा लग रहा है , इस तरह स्पष्टीकरण देते हुए...अजीब बात है न की परवाह न करते हुए भी मैं परवाह का रही हूँ...स्पष्टीकरण दे रही हूँ...मैंने किसी का बुरा नही चाहा लेकिन....खैर...अभी दिल बहुत उदास हो रहा है....भागुंगी नही क्योंकि जाउंगी कहाँ , आप सब का प्यार मुझे वापस ले आएगा...लेकिन कुछ समय तो लगेगा...अपना ख्याल रखियेगा...और लिखते रहिएगा...

rakhshanda said...

अमर जी, आप को क्या बोलूं, आप मेरी हिम्मत हैं सर, मेरे लिए क्या हैं, ये मैं लिखना चहुँ भी तो नही लिख सकती...बहुत हिम्मत दी है आपकी बातों ने, ये बताया है की किसी ऐरे गिरे परवाह नही करनी चाहिए लेकिन फिर अमर जी, आप बताइए मैंने किसी को क्या तकलीफ दी थी?
किसी को क्या हक़ है अमर जी की किसी पर ऊँगली उठाये....उसे सब की निगाहों में शक की नज़र से देखने पर मजबूर करे, मैं कोई भी नाम रखूं..कुछ भी पहनूं, कुछ भी करूँ...किसी को ये हक़ तब मिलता है जब मैं किसी पर ऊँगली उठाऊं...आप कहते हैं न की मेरे ब्लॉग पर इतने लोग आए... मुझे इस बात की कोई खुशी नही है की आज सब की नज़रें मुझ पर हैं...मुझे कभी शौक नही रहा इस तरह की चर्चा का....आज जिस तरह मेरे बारे में जांच पड़ताल हो रही है...बहुत बहुत दुःख हो रहा है मुझे.....

Anonymous said...

रक्शन्दा, आप किसे स्पष्टीकरण दे रहीं है और क्यों? कौन मांग रहा है? किसी को नहीं चाहिये आपका स्पष्टीकरण
भड़ास से जुड़ना न जुड़ना आपका व्यक्तिगत मामला है. किसी को भी कोई हक नहीं कि हम इस पर सवाल उठायें? इन्टरनेट पर हर किसी के लिये स्पेस है, भड़ास के लिये भी और गोश्त बस्टर के लिये भी
आप लिखिये, आप भाग कर जाना भी चाहेंगी तो भी जा नहीं पायेगीं ये वनवे ट्रेफिक है, यहां सिर्फ आने का रास्ता है, जाने का नहीं जो ब्लागिंग छोड़कर बाहर बैठे दिख रहे हैं, वो भी यहां से मज़बूती से जुड़े हुये हैं
सदियों तक गूंजने की बात करती हो और जरा से खुरचने से डर जाती हो?

Anonymous said...

रक्शन्दा, आज गोश्त बस्टर ने लिखा है कि भड़ास के बारे में 2 मार्च 2008 को अमर उजाला में छपा तो आपने पहले कैसे जान लिया?

इस सर्वज्ञानी को कोई बताये कि 2007 में भी कई बार अमर उजाला में छपा था

जैसे नवम्बर में अमर उजाला के संपादकीय पेज पर ब्लागिंग के बारे में भूपेन सिंह का लेख चपा था जिसमें भड़ास का प्रमुखता से जिक्र था

rakhshanda said...

मैं नही जानती की आप कौन हैं और अपना नाम क्यों नही लिख रहे, शायद आपकी कोई मजबूरी होगी, लेकिन मुझे इस से कोई फर्क नही पड़ता, आप जो भी हैं, मेरे लिए मेरे वेल विषर हैं और मैं आपकी तहे दिल से इज्ज़त करती हूँ, मुझे खुशी है की मेरे साथ आप सभी हैं...कल मैं काफी डिस्टर्ब थी, लेकिन आज ठीक हूँ, जो बात अमर जी और मेरे इतने सारे दोस्तों ने समझाई, कल मेरी समझ में नही आई, लेकिन आज मेरे बाबा ने मुझे एकदम शांत कर दिया, अब मुझे कोई टेंशन नही है, किसी को जो भी कहना है, जो समझना है, जितनी भी बकवास करनी है, वो आराम से अपने शौक पूरे कर लें..मुझे कोई फर्क अब नही पड़ने वाला, देखिये न , अगर मेरी वजह से किसी बेचारे को थोडी सी चर्चा मिल जाती है तो ले लेने दीजिये...बेचारा खुश हो जाएगा...

Anonymous said...

रक्षंदा जी देखिये आपके जरा प्रतिवाद पर घोस्ट बस्टर जी कितना पगला कर बौखलायें हैं और क्या झूठ पर झूठ छाप रहे हैं

इन्हें इतना टाइम हैं तो भड़ास पर जा के ढुंढ लें जानकारी की कब कब छपी है नहिं तो अपने दोस्त यशवंत जी से पूछ लें

शर्म तो इनको आयेगी नहीं, कुश ने कहा, लवली ने कहा की आप हैं, लेकिन फिर भी बकवास किये जा रहे हैं

इसी तरह की बकवास अभय के बारे में की, और दावे दे दे के कहा की मैं अपना विवेचन लाउंगा, बकवास करते वक्त सालिम रहे लेकिन तर्क पेश करने के बजाय पीछे हट गये

घोस्ट बस्टर एक खुन्नसी बकवासिया है जो अपनी असलियत छिपा कर दूसरों के साफ दामन पर कीचड़ उछालता फिर रहा है, लेकिन जल्द ही इसकी असलियत उजागर होने वाली है

क्योंकि अब चिट्ठाजगत के बहुत लोगों को पता है कि यह असल में कौन है,

rakhshanda said...

आज फिर से बेचारे ने मेरे बारे में छान बीन की है, मेरे कमेन्ट पढ़े हैं...कोई बात नही, वैसे मैं आपको और अनुराग अनुवेशी जी को बता दूँ की मैंने अपना ब्लॉग 2008 में ही बनाया था, 2007 में नही, और जिस अख़बार की मैं बात कर रही हूँ, वो भी 2008 का ही था, 2007 तक मैं ब्लॉग वगैरा जानती ही नही थी, मेरी प्रोफाइल में अगर 2007 आरहा है(जो की अभी तक मैंने ख़ुद नही देखा) भाई वाह रख्शंदा जी, आप तो बड़ी फेमस हो गई हैं, आप पर पूरी रिसेअर्च चल रही है....कालर कहाँ है? ज़रा अकड़ लूँ...हा हा हा
हाँ तो मैं कह रही थी की वो अख़बार मार्च २००८ का ही होगा....मेरे ख्याल में अप्रैल से मैंने लिखना शुरू किया, देखना पड़ेगा, अरे भाई, अभी साल नही हुए हमें आपके बीच आए....
और माय well wisher, मैं कोई सफाई नही दे रही, बस अब मज़ा आरहा है और घबराइये नही, मैं वैसे ही लिखती रहूंगी....आप सभी का बेहद शुक्रिया...बहुत बहुत शुक्रिया.

Neeraj Nayyar said...

your blog is Fantastic and u too. its really pretty nice. bhot acchi tarah baat ko rakha hai.... i must say aapki kalam main dam hai. keep it up... aur aapke sugg. pe amal kar diya hai and i always rem...

keep it up

Rachna Singh said...

hi rakshanda
please see my comment on ghost buster blog when you have time
i have posted the comment on his todays post

ज़ाकिर हुसैन said...

अब ऐसी संकीर्ण मानसिकता वालों को क्या कहा जा सकता है.
वाताव में तो ये सस्ती पब्लिसिटी पाने का तरीका हो सकता है.
खैर !! आप लिखती रहिये. बेखौफ

कुन्नू सिंह said...

ऎसा नही होना चाहीये था। क्यो की बाद मे सायद हिन्दीब्लागर मे धीरे धीरे लडाई वाला माहोल मी परीवर्तीत हो जाए। घोस्ट जी को एसा नही करना चाहीये था। और भी टापीक थे जीसपर वो लीख सक्ते थे।

आप लीखते रहीये आपसे कोई सबूत नही मांगेगा।

Neeraj Nayyar said...

u r going prerry fine keep it up

Sanjeet Tripathi said...

इ सब लोचा का है मोहतरमा, हम कुछ गायब का हुए का बवाल हुई गवा

Amit K. Sagar said...

बड़ी कमज़ोर है तू
जो हौसले के लिए
हाथ फैलाए है यहाँ

जितेन्द़ भगत said...

हुम्‍म! काफी लोचा है मामले में! खैर आप लि‍खते रहि‍ए रख्शन्दाजी, वैसे, कुछ लोगों की तरह मैं भी लेख से मतलब रखता हूँ, लेखक से नहीं। पर्सनल को पॉलि‍टि‍कल बनाने में जि‍नकी रुचि‍ है, वे दरवाजे पर खड़े होकर लड़े तो बेहतर रहे, ब्‍लॉग को अखाड़ा न बनाऍं! हम तो शांति‍ से पढ़ना चाहते हैं।

Anonymous said...

if possible and if its not inconvinient then please put blog archive on your blog so that it becomes easier for us to read your older post s

मोहन वशिष्‍ठ said...

अब औरत होने का सबूत पेश करना होगा?

बेहतरीन रचना बधाई के काबिल हो आप

Anonymous said...

एक भयानक खुलासा। माँ भवानी नाम का ब्लाग कौन चलाता है मालूम? कनाडा वाले उडनतश्तरी जी। एक अच्छे समझे जाने वाले आदमी का घिनौना चेहरा भी देख लो अब। यह खुलासा साइबर क्राइम टीम के माध्यम से हुआ है एक अपराधिक शिकायत के बाद। जल्दी ही विस्तार से सब कुछ बतायेंगे----

sandy said...

यह बहुत ही सर्मनाक कार्य है
लेखनी का दुरुपयोग है
जिस माध्यम से हम आपस में जुड़ कर एक
एक दुसरे कि लेखन शालियों, विचारों को बाटते है
उस माध्यम से एक दुसरे कि बेयीज्ती करना सरासर गलत है

राज भाटिय़ा said...

रमजान की मुबारकवाद आप को ओर आप के सभी जानपहचान वालो को ओर आप के परिवार को

rakhshanda said...

आप सब का बेहद शुक्रिया दोस्तों, जिन्होंने मुझे ये अहसास दिलाया की इतने लोग मेरे अपने हैं, आज मैं जिन हालत से गुज़र रही हूँ, ये मुझ पर ज़बरदस्ती थोपे गए हैं सिर्फ़ चर्चित होने की भूख में, खैर मुझे कोई फर्क नही पड़ता और वक्त इस बात को जल्द साबित भी कर देगा.बहरहाल इस अपनाइयत का बेहद शुक्रिया.

ज्ञान said...

जहाँ आपको सर्वश्री की लिस्ट में रखा गया है, वहाँ नज़र नहीं गयी क्या आपकी?

सुजाता said...

रक्षन्दा जी ,
आपका कहना सही है कि मुझे इस पोस्ट की जानकारी नही मिल पायी। पिछले कुछ दिन बीमार रही और ब्लॉग पर न आ सकी। यह सब पढकर दुख भी हुआ और खेद भी।
अभी कल ही सब देखा, पढा मैने । और सच कहूँ कि घोस्ट बस्टर से ऐसी उम्मीद नही थी।
आपकी पोस्ट एक सही जवाबी कार्यवाही थी ,हम सभी आपके साथ हैं।
आप गूंजिये और सदियों तक वह गूंज सुनाई दे इंशा अल्ला यही ख्वाहिश है।

रौशन said...

कुछ बातें चुभती हैं और कभी कभी कुछ बातों से चिढ लग जाती है. ऐसा ही एक ब्लॉग पर हमें यूँ ही घुमते फिरते नजर आ गया.
अजीब बात है की लोग ब्लॉग पर लेखों की जगह यह जाने में वक्त जाया करते हैं की अमुक ब्लॉगर कहीं महिला के नाम पर पुरूष तो नही है. उन साहब ने बड़े एहतराम से ये साबित किया है की रक्षंदा जी ( यानि आप ) वास्तव में पुरूष हैं और कुछ बातों से चिढी हुयी हैं. अच्छा होता कि इन साहब ने लेखों का जवाब दिया होता बजाय इसके कि वो महिला पुरूष पर चर्चा में अपना और तमाम लोगो का वक्त जाया करें. पर एक फितरत होती है अगर आप तर्क नही कर सकते तो कुतर्क करें वैचारिक मतभेदों को व्यक्तिगत लड़ाई में बदलें और आपको झूठा साबित करने में दम लगायें . इस तरह के मोर्चो से हम भारतीय अनजान नही हैं और हमने समय समय पर इस तरह के हमलों को लोगो पर होते हुए देखा है और इस लड़ाई के तौर तरीकों को पहचाना है.
उन साहब ने एक और हास्यास्पद बात की है उन्हें प्रेटी वूमन शब्द छिछोरा नजर आता है. प्रेटी वूमन और तमाम शब्दों की भाति एक शब्द भर है जिसका मतलब इंसान अपनी मानसिकता , अपने सोचने के ढंग से निकलता है. उन साहब के द्वारा निकले शब्दार्थ उन साहब की सोच बयां करते हैं और आगे क्या कहा जा सकता है.
न जाने वो साहब प्रेटी और वूमन शब्दों को अलग अलग सम्मान के योग्य मानते हैं भी या नही.
खैर यह एक तरीका होता है बातों को पटरी से उतरने का. हमने पाया कि लोगों ने उन्हें समझाने कि कोशिश की कि वास्तव में रक्षंदा जी महिला हैं. हमें नही समझ में आता कि ये कोशिश क्यों?
नाम और तस्वीर देखने से पहले अगर ब्लॉग में पोस्ट देखा जाय और उसको जांचा परखा जाय तो बेहतर होगा.

DHAROHAR said...

Aapki lekhni mein spashta hi kisi nari ki samvedna jhalakti hai.aise kise post ki charcha kar apne vyarth hi kisi ko sasti ppublicity provide kara di. Jiska iljaam to aapko apne upar lena hi hoga. Aur iske prayaschit mein asha hai sirf apni posts par dhyan dengi.Khuda Hafeez.

aleem said...

bahut acha likhne ka pattern hai aapka upar wale ne aapko behtareen knowledge diya hai aapko bas aap likhte rahiye